Last Updated: Wednesday, June 20, 2012, 21:50

ज़ी न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली/पटना : नरेंद्र मोदी को लेकर एनडीए में अनबन बुधवार उस समय सतह पर आ गई जब जदयू ने यह चेतावनी दे डाली कि अगर किसी कट्टरवादी चेहरे को राजद के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया तो वह गठबंधन से बाहर आ जाएगा। भाजपा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि कोई यह फतवा नहीं दे सकता कि कौन धर्मनिरपेक्ष है और कौन नहीं जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आश्चर्य जताया कि कोई हिन्दूवादी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनना चाहिए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 2014 के लोकसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष छवि वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की वकालत किये जाने के बाद उनकी पार्टी जदयू के वरिष्ठ नेता एवं महासचिव शिवानंद तिवारी ने मोदी विरोधी स्वर को नयी हवा दे दी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से एनडीए के प्रधानमंत्री उम्मीदवार संबंधी टिप्पणी के बाद जदयू और भाजपा में टकराव बढ़ गया है। नीतीश और मोदी के बीच अब खुली जंग छिड़़ गई है और नौबत एनडीए में टूट के कगार तक आ पहुंची है। उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के रूप में समर्थन किया।
नीतीश कुमार ने बुधवार को कहा कि गुजरात में 2002 हिंसा के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हटाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि हम गुजरात हिंसा को अब तक नहीं भूले हैं। हालांकि उन्होंने वाजपेयी को उदारवादी प्रधानमंत्री बताया।
नीतीश ने यह भी कहा कि मैं स्वार्थी नहीं हूं। यदि मोदी मैदान में उतरे तो वह गठबंधन का साथ छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी में दो धाराएं हैं, एक हिंदूवादी और दूसरा उदारवादी। अब भाजपा अपना रुख स्पष्ट करे।
उधर, जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने आज कहा कि यह भाजपा को तय करना है कि उसे सरकार बनानी है या विपक्ष में बैठना है, क्योंकि देश कट्टर चेहरों के पक्ष में नहीं है।
तिवारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि भाजपा ने 1996 में ही यह समझ लिया था कि वह अपने कट्टर हिंदुत्वक एजेंडे के आधार पर सरकार नहीं बना सकती है और इसलिए राम मंदिर, समान आचार संहिता और जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाने जैसे तीन विवादास्पद मुद्दों को अलग रखने पर सहमति बनाने के बाद राजग का गठन किया गया। इस बदले हुए रुख को आरएसएस का भी समर्थन प्राप्त था।
तिवारी ने कहा कि चुनाव के बाद के सर्वेक्षणों में यह उल्लेख किया गया था कि अगर गुजरात में हुए दंगों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मोदी सरकार को बख्रास्त कर दिया होता तो 2004 के आम चुनाव में राजग पराजित नहीं होता।
जदयू नेता ने कहा कि वाजपयी ने मोदी से राजधर्म का पालन करने को कहा था और चाहते थे कि सरकार जाए लेकिन इस प्रयास पर लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने विटो कर दिया। तिवारी ने कहा कि गुजरात दंगों के बाद ऐसे लोग पार्टी से विमुख हो गए, जिन्होंने वाजपेयी के उदार चेहरे के चलते भाजपा को वोट दिया था और अस्थिर (फलोटिंग) वोट कांग्रेस के खाते में चला गया क्योंकि देशवासी कट्टर राजनीति को स्वीकार नहीं करते।
तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा ने कहा कि किसी को भी उसके नेताओं की धर्मनिरपेक्ष विश्वसनीयता पर फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है। भाजपा के नेता बलवीर पुंज ने कहा कि यह अनावश्यक विवाद है। इस देश में किसी को भी यह फतवा जारी करने का अधिकार नहीं है कि कौन धर्मनिरपेक्ष है और कौन नहीं। लोगों की अपनी राय है।
वहीं, तिवारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि भाजपा में दो तरह की सोच है। एक राय यह है कि अगर वह सत्ता में आना चाहती है तो राजग जैसे बड़े समूह की जरूरत है क्योंकि कट्टर चेहरे को आगे बढा कर सरकार नहीं बनाई जा सकती। उन्होंने कहा कि दूसरी राय यह है कि 1996 के पहले की अपनी विचारधारा में लौटा जाए।
उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार के रूप में समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा प्रधानमंत्री होना चाहिए जो हिंदुत्व के विचारों को प्रदर्शित करता हो।
भागवत ने यहां संवाददाताओं से कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा को जीवित रखने के लिए हिंदू समाज को एकजुट होना चाहिए। भागवत की यह टिप्पणी तब आई है, जब एक दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा था कि साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए।
नीतीश ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया था कि मोदी को राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भागवत ने सवाल किया कि क्या नीतीश यह तय करेंगे कि किस तरह का व्यक्ति एक अच्छा प्रधानमंत्री हो सकता है। उन्होंने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें खुद को हिंदू कहते हुए डर लगता है।
First Published: Wednesday, June 20, 2012, 21:50