बहुत याद आते हैं किशोर दा - Zee News हिंदी

बहुत याद आते हैं किशोर दा

 

आभास कुमार गांगुली, कुछ इसी नाम से बचपन में पुकारे जाते थे किशोर कुमार. लोग आज उन्हें किशोर दा के नाम से भी जानते हैं.

4 अगस्त 1929 को खंडवा, जो अब मध्य प्रदेश में है, वहां के एक ब्राहमण परिवार में पैदा हुए थे किशोर दा. मशहूर अभिनेता अशोक कुमार के भाई किशोर का भी रुझान सिनेमा की ओर कम उम्र में ही हो गया. वह बांबे टॉकीज के साथ जुड़े, जहां उनके भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता मौजूद थे। बड़े भाई की मौजूदगी का फायदा मिला और किशोर को पहली बार 1946 में फिल्म 'शिकारी' में छोटी सी भूमिका निभाने का मौका मिला.

हलांकि उनकी आवाज़ का जादू हर फिल्म में देखने और सुनने को मिला पर, सन् 1970 से 80 का दशक बेहद खास रहा. इस दौरान उन्होंने कई ऐसे गीत गाए, जो आज भी लोगों की रूह को छू जाते हैं. 'जिंदगी एक सफर है सुहाना', 'ये जो मोहब्बत है', 'एक रास्ता है जिंदगी' और 'मंजिले अपनी जगह' जैसे सैकड़ों गीत हैं, जो संगीतप्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए घर कर गए हैं.

अपने बहुमुखी प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध किशोर ने गायकी और अभिनय के साथ कई फिल्मों का निर्माण भी किया. उनकी फिल्म दूर वादियों में कहीं में रजा मुराद, उनके पिता और उनकी भांजी सोनम साथ नजर आए थे. इसे याद करते हुए मुराद कहते हैं कि इस फिल्म में हमारी तीन पीढ़ियों के लोग नजर आए थे. किशोर दा एक बेहतरीन फिल्मकार भी थे.

अपने पारिवारिक जिन्दगी और सार्वजनिक जीवन में भी बराबर मशहूर हुए किशोर कुमार, उन्होंने चार शादियां की. उनकी दूसरी शादी मशहूर अदाकारा मधुबाला के साथ हुई थी. मधुबाला की मौत के साथ ही यह रिश्ता टूटा. हिंदी सिनेमा में वो एकमात्र ऐसे गायक हैं, जिन्होंने आठ बार सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता. इसके अलावा उन्हें कई और पुरस्कार मिले.

13 अक्टूबर, 1987 को किशोर कुमार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. मध्यप्रदेश के खंडवा स्थित उनके पैतक आवास पर किशोर कुमार के गीत संगीत का एक संग्रहालय बनाया गया है.

 

First Published: Thursday, August 4, 2011, 17:00

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